Shaily Bhagwat

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कहीं धूप, कहीं छाव -13-Jun-2022

कहीं धूप, कहीं छाव 


जब ये लब कुछ भी न कह पाये
तब इनकी जबानी तुम पढ़ लेना। 
                 🌹
बालों में अनुभव की चांदी छाये
तो इनकी कहानी तुम पढ़ लेना।
                🌹
कहीं धूप,कहीं छाँव से बीते दिन 
एक शाम सुहानी तुम पढ़ लेना।
                 🌹
मेरी बचकानी बातें याद करो तो 
इनमें छुपी गहराई तुम पढ़ लेना।
                  🌹
ये शब्द नहीं सब बयां कर सकते
कभी ख़ामोशी भी तुम पढ़ लेना।
                 🌹
जुड़ने टूटने के सिलसिले बहुत हुए
इस ठहराव को बस तुम पढ़ लेना।
                   🌹
तय न कर पायी जो दूरियां कभी
वो लंबी मज़बूर राहें तुम पढ़ लेना।
                   🌹
दुनिया मांगेगी हर चीज का हिसाब
खोया पाया कितना तुम पढ़ लेना।
                  🌹
बारिश की बूंदों संग बहेगा हर बार
मेरी आँखों का पानी तुम पढ़ लेना।
                   🌹
 दुनिया की भीड़ में गुम हो जाऊ 
तो प्रेम की निशानी तुम पढ़ लेना।
                   🌹
दिल के खत्म होते बेज़ार किस्से में
इक 'आस' की चाह तुम पढ़ लेना।

#प्रतियोगिता हेतु

स्वरचित
शैली भागवत "आस"✍️

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13 Comments

Zakirhusain Abbas Chougule

16-Jun-2022 02:29 PM

Nice

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Seema Priyadarshini sahay

15-Jun-2022 06:56 PM

बहुत खूबसूरत

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Khushbu

14-Jun-2022 09:35 PM

शानदार प्रस्तुति 👌

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